हराम न
कर
अपने नग्मात मेरे नाम न कर
मुझको यूं बक़्फ़–ए-इन्तक़ाम न कर
मैं किसी काम आ नहीं सकता
मुझको झुक झुक के यूं सलाम न कर
ज़ख़्म अपने छुपा के रख दिल में
अपनी मजबूरियों को आम न कर
कुछ न कुछ कर के भी दिखा साईं
जिंदगी को युहीं तमाम न कर
कम से कम वक़्त को दुआएं दे
खून पीकर मिरा हराम न कर
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